जून के तीन दिन तक चलने वाला यह फेस्टिवल महिलाओं की प्रजननता और स्त्रीत्व के लिए मनाया जाता हैं। इसके अलावा महिलाओं की मासिक धर्म की प्रकिया संतुलित बनाने के लिए भी इसे मनाया जाता है। एेसा माना जाता है कि धरती और महिला का दर्द एक सामान है। जैसे धरती हम सबकी मां होती है वैसे ही पीरियड्स आने के बाद महिलाएं भी इस धरती की तरह मां बनने की क्षमता रखती हैं। पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में आने वाले बदलाव का स्वागत किया जाता है।
पुरुष और महिलाएं इस फेस्टिवल में हिस्सा लेते है। फेस्टिवल के दौरान घरों को सजाया जाता है और खेलों का आयोजन किया जाता है। इन तीन दिनों में फूल तोड़ना मना है। इस फेस्टिवल के बाद किसान अपनी भूमि को स्नान करवाते है।



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