वैज्ञानिकों का नया दावा, जहां डेंगू के सबसे ज्यादा मामले वहां कोरोना के मरीजों की संख्या बहुत कम


कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर में कई शोध किए जा रहे हैं और रोज ही वैज्ञानिकों द्वारा नए-नए दावे किए जा रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिससे कोरोना वायरस के व्यवहार को लेकर विज्ञानी हैरत में हैं। नए शोध में पता चला है कि जिन क्षेत्रों में डेंगू वायरस ज्यादा संक्रमित रहा, वहां पर कोरोना से कम लोग ग्रस्त हुए हैं। डेंगू वायरस के प्रति शरीर में बनने वाली एंटीबाडी कोरोना वायरस को शरीर की कोशिकाओं में बढ़ने से रोकती है।


इंडियन इंस्टीटयूट आफ केमिकल बायोलॉजी ने भारत में शोध किया था, जिसमें कहा गया कि डेंगू की एंटीबाडी कोरोना संक्रमण रोक सकती है। अब ब्राजील और यूके के विवि और इजरायल के क्लीनिकल इंफेक्सियस डिसीज की ताजी रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है।


वैज्ञानिकों ने माना है कि भारत और ब्राजील जैसे देशों में बड़ी संख्या में लोग डेंगू के शिकार होते हैं, शायद इसीलिए यूरोपीय देशों की तुलना में मौत की दर कम रह गई। चिकित्सा विज्ञानी डेंगू और कोरोना के हाट स्पाट के आंकड़ों पर रिसर्च कर रहे हैं। यूके के वैज्ञानिकों ने कहा है कि डेंगू की वैक्सीन भी कोरोना संक्रमण का खतरा कम कर सकती है। खासकर, कोरोना की वैक्सीन आने तक इससे कुछ हद तक इम्युनिटी पाई जा सकती है।


दुनियाभर के शोध में हैरान करने वाली बात सामने आई है कि अगर पहले कभी कोई व्यक्ति डेंगू का मरीज रहा है तो वो जांच में कोविड पॉजिटिव आ सकता है जबकि, यह गलत रिपोर्ट होती है। माइक्रोबायोलोजिस्ट डा. अमित गर्ग कहते हैं कि कोरोना और डेंगू दोनों वायरस एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। कोरोना फ्लू की तरह सांस के जरिए, जबकि डेंगू एक मच्छर के काटने से होता है। दोनों के कुछ लक्षण मिलते हैं, लेकिन डेंगू में शरीर में लाल चकत्ते और तेज बुखार ज्यादा देखा जाता है। अब यह देखना जरूरी है कि जिन्हें डेंगू हुआ, उन्हें कोविड हुआ या नहीं।

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