1. युजीनॉल तुलसी में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। माना जाता है कि तुलसी के ज्यादा उपयोग से हमारे शरीर में युजीनॉल का स्तर बहुत बढ़ सकता है। इसका बढ़ना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। यह तत्व सिगरेट और कुछ फूड फ्लेवरिंग पदार्थों में भी पाया जाता है। इससे खांसी के दौरान ब्लड आना, तेजी से सांस चलना और यूरीन में ब्लड जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
2. तुसली के पत्तों को ज्यादा खाने से शरीर का ब्लड पतला हो सकता है। वालफरिन और हेपरिन जैसी दवाओं को लेने वाले रोगियों को तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए। चूंकि तुलसी इन दवाओं में मौजूद खून को पतला करने के गुण की गति बढ़ा सकती है। इसके अलावा इसे अन्य एंटी-क्लोटिंग दवाओं के साथ भी नहीं लेना चाहिए।
4. तुलसी के पत्तों का अधिक सेवन से मर्दों की प्रजनन शक्ति भी प्रभावित हो सकती है। इस अजीबोगरीब तर्क पर एक शोध किया जा चुका है जिसमें खरगोशों को दो गुटों में बांटा गया। इसके बाद एक ग्रुप को 30 दिनों तक दो ग्राम तुलसी के पत्ते खाने के लिए दिए गए। इसके बाद जांच की गई तो पता चला कि जिन्हें तुलसी रोजाना खाने दी गई थी उन खरगोशों के शुक्राणुओं की संख्या में महत्वपूर्ण घटाव नजर आया।
5. अगर गर्भावस्था में महिलाएं तुलसी के पत्तों को ज्यादा मात्रा में खाती हैं तो इसका प्रभाव मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है। तुलसी को खाने से गर्भवती महिलाओं का गर्भाशय सिकुड़ जाता है। जिससे बच्चे के जन्म के समय दिक्कत पैदा हो सकती है। इसके अलावा कुछ और रिएक्शन होने की भी संभावना होती है।
6. तुलसी के सेवन से कुछ दवाओं का असर कम हो जाता है और कुछ का बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। दोनों ही स्थितियों में व्यक्ति को मूल बीमारी से छुटकारा नहीं मिलता है। जैसे कि डायजेपाम व स्कॉपॉलामिन दो ऐसी दवाएं हैं जो चिंता, उल्टी, घबराहट आदि को कम करने में मदद करती है। लेकिन तुलसी से इन दोनों दवाओं का असर कम हो सकता है।
7. तुलसी के पत्तों को चबाना नहीं चाहिए इन्हें सीधे निगल जाना चाहिए क्योंकि इसके पत्तों में पारा की मात्रा होती है जिस कारण यह दांतों के लिए भी हानिकारक है।



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