आपको ये बता दें कि, जिन धार्मिक जगहों में रोजाना घंटी बजती है उन्हें जाग्रत देव मंदिर बोला जाता है। मंदिर के प्रवेश गेट पर घंटी बजाने से ईश्वर का आशीर्वाद और धन मिलता है। यह प्रथा प्राचीन काल से ही चली आ रही है जिसका पालन हर आस्तिक मनुष्य करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि, मंदिर में घंटी बजाने से पहले ही उसके प्रवेश द्वार पर लोग माथा क्यों टेकते हैं? आइए आज हम आपको इसी बात की जानकारी देते हैं।
जैसा की आप जानते हैं कि, मंदिर में प्रवेश करते वक्त मंदिर की सीढ़ियों को स्पर्श करना यह एक आम प्रथा मानी जाती है। ऐसा किसी भूले भी नहीं होता कि वह मंदिर की पहली सीढ़ी न स्पर्श करे लेकिन कभी आपने सोचा कि आप ऐसा क्यों करते हैं या सिर्फ अपने बुज़ुर्गों द्वारा की गई चीजों को आंख मूंदकर बस उसे चलाते आ रहे हैं?
आपको बता दें कि ऐसा करने के पीछे एक सामान्य मकसद यह है कि आप प्रवेश द्वार से ही देवता की पूजा शुरू कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि, हम ऐसा इसलिए करते हैं मंदिर में प्रवेश करने के लिए आप देवता की अनुमति ले रहे हैं। इन दोनों बातें से साफ होता है कि, हम ऐसा इसलिए करते हैं ताकि हम देवता को अपने विनम्र स्वभाव का परिचय दे सकें। मंदिर द्वार की पहली सीढ़ी आपको मुख्य मंदिर और मूर्ति से जोड़ती है।
हिंदू मंदिर वास्तुकला, स्थापत्य वेद पर आधारित है जिसका मतलब है कि मंदिर का पूरा ढांचा इसी वेद को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। इस वेद के अनुसार, गोपुरम यानि, मुख्य प्रवेश द्वार पर ही मंदिर के देवता के पेअर विराजमान रहते हैं। यही कारण है कि मंदिर की पहली सीढ़ी छूना भगवान के पैर छूने के बराबर माना जाता है।

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