लैंडर विक्रम के नीचे की तरफ 5 थ्रस्टर्स लगे हैं, जिसके जरिए इसे चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी। लैंडर के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगे हुए हैं। इन्हे स्पेस में यात्रा के दौरान दिशा निर्धारित करने के लिए ऑन किया जाता है। लैंडर का जो हिस्सा झुका है, उसी हिस्से में ये थ्रस्टर्स भी हैं। अगर ऑर्बिटर के जरिये दबे हुए हिस्से (एंटीना) ने पृथ्वी से भेजे जा रहे कमांड को रिसीव कर लिया, तो विक्रम अपने एक बार फिर खड़ा हो जाएगा। ऐसे में इसरो का 'मिशन चंद्र' फिर से शुरू हो जाएगा, जो कि फिलहाल अटका हुआ है।
इसरो अभी तस्वीर से मिलने वाले और डेटा का इंतजार कर रहा है। अभी विक्रम पर सूरज की किरणें ठीक तरह से नहीं आ रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक इसपर सूरज की किरणें पड़ने का भी इंतजार कर रहे हैं। ताकि सूरज की किरण पड़ने से इसकी रोशनी में ये देखा जा सके कि विक्रम को कितना नुकसान पहुंचा है। इसमें अगले दो से तीन दिन और लग सकते हैं, क्योंकि ये चांद के ऑर्बिट पर निर्भर करता है।



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