तब सभी देवताओं ने चंद्रमा पर यह कहकर दबाव डाला कि धर्म की रक्षा करना सभी देवताओं का कर्तव्य ही नहीं धर्म भी है। इसलिए वे अथवा उनका पुत्र अपने कर्तव्य से कैसे विमुख कैसे हो सकते हैं। देवताओं के इस प्रकार दबाव डालने पर चंद्रमा विवश हो गए थे। लेकिन फिर भी उन्होने देवताओं के सामने एक शर्त रख दी। वह शर्त यह थी कि उनका पुत्र ज्यादा समय तक पृथ्वी पर नहीं रहेगा। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के मित्र देवराज इन्द्र के पुत्र अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु के रूप में जन्म लेगा। वह भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की अनुपस्थिति में अकेला ही अपना पराक्रम दिखाता हुआ वीरगति को प्राप्त करेगा। जिससे तीनों लोकों में उसके पराक्रम की चर्चा होगी।
इसके साथ ही चंद्रमा ने देवताओं के सामने यह शर्त भी रख दी थी कि अभिमन्यु का पुत्र भी उस कुरु मंचा का उत्तराधिकारी होगा। चंद्रमा के इस हठ के कारण सभी देवता विवश हो गए। तब चंद्रमा के पुत्र वर्चा ने महारथी अभिमन्यु के रूप में जन्म लिया था। जिसके बाद द्रोणाचार्य द्वारा रचे गए चक्रव्युह में अपना तीनों में अपना पराक्रम दिखाकर अल्पायु में ही वीरगति को प्राप्त हो गए। कहते हैं कि यही कारण था कि श्रीकृष्ण ने अभिमन्यु को नहीं बचाया था।

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