खर्राटे आपके शरीर की इन समस्याओं की तरफ संकेत करते हैं


खर्राटे आने का मुख्य कराण श्वास में रूकावट होता है। श्वसन तंत्र के ऊपरी भाग फेरिंक्स की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं, जिस वजह से सांस भीतर  लेने की प्रक्रिया (इंसपीरेशन) में ध्वनि पैदा होती है। ऐसे में अचानक तेज खर्राटे आना इस बात का संकेत होते हैं कि रूकी हुई श्वास दोबारा शुरू हो गई है। डॉक्टरों ने पाया है कि तेज खर्राटे सांस में रुकावट पैदा कर नींद में दम भी घोंट सकते हैं। तो इस समस्या को हल्के में न लें और जानें कि खर्राटे किन दूसरी समस्याओं की तरफ संकेत कर सकते हैं।

सेक्स में समस्या
आश्चर्य की बात नहीं है कि वे पुरुष जो भारी खर्राटे लेते हैं, उनके बेडरूम में कठिनाईयों का सामना (यौन असंतोष) करने की संभावना अधिक होती है। शोध से भी ये बात सामने आई है कि अधिक खर्राटे लेने वाले लोगों का यौन जीवन संघर्षमय होता है।

ब्लड प्रेशर की समस्या
तकरीबन सत्तर प्रतिशत उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को स्लीप एप्निया भी होता है। जर्नल ऑफ़ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, क्योंकि भारी खर्राटे लेना एपनिया के सबसे आम लक्षणों में से एक होता है, खर्राटे लेना उच्च रक्तचाप का संकेत हो सकता है।

मोटापा
अधिक वजन या आकार से बाहर होना, फैटी टिशू और खराब मांसपेशियां भी खर्राटे आने का कारण होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एक शोध के अनुसार खर्राटे लेने के कारण नींद में बाधा उत्पन्न होती है, जोकि मोटापे का कारण बनती है।

कैंसर
विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के एक शोध निष्कर्ष निकाला कि स्लीप एपनिया से ग्रसित लोगों में कैंसर के कारण मरने की पांच गुना अधिक आशंका होती है। तो खर्राटे लेना कैंसर से भी संबंधित हो सकता है।

हृदय रोग का संकेत
चिकित्सक का मानना है कि नींद सम्बंधी एक अन्य बीमारी `ऑब्सट्रक्टिव स्लीफ एपनिया` भी हृदयरोग के लिए जिम्मेदार होती हैं लेकिन इस हृदय सम्बंधी बीमारी के पीछे असली वजह खर्राटे हैं। डेट्रॉइट स्थित हेनरी फोर्ड हेल्थ सिस्टम ने भारी खर्राटों और धमनी क्षति के बीच एक भारी संबंध पाया, जोकि स्ट्रोक और दिल के दौरे के लिए एक बड़ा जोखिम कारक होता है।

स्लीप एप्‍निया
सोते समय शरीर की मांसपेशियां शिथिल होकर फैल जाती हैं। जिससे श्वांस नली संकरी हो जाती है और वायु रुकने लगती है। इसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्‍निया कहा जाता है। सोते समय जब सांस पूरी तरह बंद हो जाती है तो शरीर में आक्सीजन की मात्रा व हृदय की धड़कन भी कम होने लगती है। इससे हृदय रोगियों की मौत तक हो सकती है। 

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