- समुद्र शास्त्र के मुताबिक जो लोग ऊंचे स्वर में बोलते हैं वे दूसरों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते हैं। साथ ही ऐसे लोग हठपूर्वक अपने अधूरे ज्ञान को दूसरों पर थोपना चाहते हैं। ऐसे लोग किसी दूसरे की बात सुनना पसंद करते हैं।
- समुद्र शास्त्र के मुताबिक कुछ लोग इतनी तेजी से बोलते हैं कि उनकी बात किसी को भी समझ में नहीं आती है। ऐसे जातक न तो किसी बात को छुपाते हैं और न ही उसमें किसी बात को स्पष्ट करने का साहस होता है। ऐसे लोग धोखेबाज हो सकते हैं।
- कुछ लोग जब बोलते हैं तो उनकी वाणी में कर्कशता होती है। माना जाता है कि ऐसे लोग झगड़ालु, दुखी और लक्ष्यहीन होते हैं।
- कई लोगों के बोलने का अंदाज शेर की तरह गुर्राने जैसा होता है। ऐसे लोग संयम रखने वाले, विद्वान, ज्ञानी और अध्ययन करने वाले होते हैं।
- वहीं धीरे से बोलने वाले लोग अविकसित बुद्धि, अज्ञानी, संकुचित बुद्धि, धूर्त, कामचोर और असफल होते हैं।
- गंभीर और संतुलित स्वर मानव मस्तिष्क की उच्च प्रवृत्तियों का सूचक होता है। इसलिए गंभीर और संतुलित बोलने वाले लोग अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार होते हैं।

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