फ्लोरिनेटेड कैमिकल्स जिन्हें पीएफएएस या पीएफसी के तौर पर जानते हैं, सेहत के लिए हानिकारक हैं। इन्हें दाग-धब्बे मिटाने, नॉन स्टिक बर्तनों, फर्नीचर, कारपेट, कपड़ों व ब्यूटी प्रोडक्ट को बनाने में प्रयोग करते हैं। नॉट्रे डेम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार सैंडविच व बर्गर रैपर में 38 फीसदी, मिठाई व ब्रेड के रैपर में 56 फीसदी, खाना पैक करने वाला पेपर में 46 फीसदी, पेपरबोर्ड में 20 फीसदी और जूस, दूध आदि पेय पदार्थ में 16 फीसदी फ्लोराइन होता है।
फ्लोरिनेटेड कैमिकल्स की अधिक मात्रा किडनी व टैस्टीकुलर कैंसर के साथ कोलेस्ट्रॅाल बढ़ाती है। थायरॉइड व अन्य हार्मोन में गड़बड़ी से बच्चों के शारीरिक विकास पर असर होता है। गर्भावस्था के दौरान के रक्त में पीएफएएस की मात्रा ज्यादा होने से गर्भपात की आशंका बढ़ती है।

إرسال تعليق