पुराणों के अनुसार इन 3 लोगों के घर भोजन करना हो सकता है हानिकारक


महाभारत की एक पौराणिक कथा के अनुसार जब भीष्म पितामाह तीरों की शैय्या पर लेटे थे तो द्रौपदी ने उनसे पूछा कि जब मेरा चीरहरण हो रहा था तो आपने उसका विरोध क्यों नहीं किया था, जबकि आप उसे चाहते हुए रोक सकते थे। भीष्म पितामाह ने कहा कि मनुष्य जैसा अन्न खाता है वैसी ही उसकी बुद्धि और मन हो जाता है। उस समय मैं कौरवों का अधर्मी अन्न ग्रहण कर रहा था, इसी कारण मेरी बुद्धि भी अधर्म का विरोध नहीं कर पाई थी। इसी तरह की मान्यता और कथाएं समाज में प्रचलित हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोग बताए गए हैं जिनके घर भोजन करने हानिकारक माना जाता है....

चोर या अपराधी :- किसी चोर या अपराधी प्रवृत्ति के घर का भोजन नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार माना जाता है कि वहां भोजन करने से उसके पापों का असर हमारे जीवन पर भी हो सकता है।

चरित्रहीन व्यक्ति :- यहां इस शब्द का अर्थ वो व्यक्ति है जो अपनी इच्छा से अमर्यादित कार्य करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार माना जाता है कि जो व्यक्ति ऐसे घर में भोजन करता है वहां के पापों का बोझ उसके जीवन पर पड़ने लगता है।

सूदखोर :- ये वो व्यक्ति होता है जो दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाकर अनुचित रुप से अत्याधिक ब्याज प्राप्त करते हैं। गुरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोगों के घर पर भी भोजन नहीं करना चाहिए। किसी की मजबूरी का फायदा उठाना किसी भी पाप से कम नहीं माना जाता है।

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