यहां महिलाओं के स्तनों के आधार पर बताई जाती हैं उनकी पवित्रता


एक तरफ जहां लोग सेक्स शब्द का प्रयोग ही काफी भद्दा मानते हैं, वहीं देश की सरकार स्कूलों में बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने पर विचार कर रही है। लेकिन ये एजुकेशन तभी संभव है जब उनके पास सेक्स जैसे विषय पर खुलकर और सही ढंग से इसके लिए अध्यापक हो।

लेकिन आपको बता दें कि, सालों से केरल के एक चर्च में सेक्स के बारे में लोगों को खुलकर बताया जाता है। इस चर्च में सेक्स को बेहद पवित्र बताया जाता है। साथ ही स्तनों के आधार पर कितने प्रकार की महिलाएं होती है, इसका भी ज्ञान दिया जाता है।


केरल में एक चर्च से प्रकाशित होने वाली एक पत्रिका में सेक्स के बारे में लिखा गया है कि सेक्स बेहद पवित्र होता है। किसी भी व्यक्ति के शरीर की कामुकता कोई गलत बात नहीं होती है। केरल में स्थित आलझुप्पा बिशप की मुखरेखा नामक एक मासिक पत्रिका निकलती है। इस पत्रिका के इस माह के अंक में सेक्स और आयुर्वेद शीर्षक से चार पन्ने का एक लेख छापा गया है।

इस लेख में डॉक्टर संतोष थॉमस कहते हैं कि, सेक्स शरीर और दिमाग का एक पवित्र उत्सव की तरह ही है। बिना शारीरिक संबंधों के प्यार बिना पटाखों के त्यौहार जैसा ही रह जाएगा। अगर दो मन आपस में जुड़ना चाहते हैं तो फिर उनके शरीर को भी आपस में एक-दूसरे से जुड़ जाना चाहिए।


बता दें कि इस मैगजीन में पहली बार इस तरह का लेख छापा गया है। वहीं, भक्तिमार्ग पर चलने वाले लोगों में आम धारणा है कि सेक्स किसी भी व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन के लिए अच्छा नहीं होता।

इतना ही नही इस लेख में आदर्श महिला का स्वरूप भी बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि वाग्भाता के शास्त्रीय आयुर्वेद लेख आष्टांग हृदयम कहता है कि, स्तनों के आकार के आधार पर महिलाओं को चार वर्गों में बांटा जा सकता है। पद्मिनी, चित्रिणी, संघिनी और हस्तिनी। और इन्ही आधार पर एक आदर्श महिला का चयन किया जाता है।

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