आपको बता दें, कि आसानी से खुल जाने वाले फीतों के पीछे साइंस की कुछ जटिल समीकरण होती हैं।क्रिस्टॉफर डेली-डायमंड, क्रिस्टीन ग्रेग और ऑलिवर ओरैली ने इन्हीं समीकरण का हवाला देते हुए फीतों के बार बार खुलने की प्रक्रिया समझाई है। असल में जूते का फीता सेकेंडों के भीतर खुल जाता है। क्रिस्टीन ग्रेग ने बताया कि आप अपने जूते के फीते को बांधते हैं जिसके बाद वो काफी समय तक बंधे रहते हैं। लेकिन, जैसे ही उनमें कोई शारीरिक हरकत होती है तुरंत उनमें लगी गांठ खुल जाती है। दरअसल, दौड़ते समय हमारा पैर जमीन पर सात गुना ज्यादा गुरुत्व बल के साथ संपर्क में आता है। क्रिया प्रतिक्रिया के नियम के मुताबिक, जमीन से भी उतना ही तेज बल वापस लौटता है।
ऐसे में पैर की मांसपेशियां इसे बर्दाश्त कर लेती हैं, लेकिन फीते की गांठ ऐसे झटकों से ढीली पड़ने लगती है। जमीन पर पैर पड़ते ही गांठ पर जोर पड़ता है और फिर पैर के हवा में लौटने पर गांठ फिर से ढीली हो जाती है। बार-बार ऐसा होते रहने पर फीता आखिरकार खुल जाता है।

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