बायां अंग पर तिल - शुभ
भौहों के मध्य पर तिल - राज्यप्रद
गाल पर तिल - मिठाइयां और स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होते हैं
नाक पर तिल- राजपत्नी
कान या गले पर तिल- प्रथम संतान पुत्र होता है
चलने से पीछे से मार्ग में धूल उड़े वह कुलों को कलंकित करने वाली होती है
यदि किसी स्त्री की कनिष्ठा अंगुली भूमि का स्पर्श न करें तो वह एक पति को त्याग कर दूसरा विवाह करती है
पैर का ऊपर वाला भाग ऊंचा, पसीनारहित, पुष्ट चिकना और कोमल हो तो वह रानी होती है, अगर इससे विपरीत हो तो दरिद्रता आती है
नाभि गहरी, दाहिनी तरफ घूमी हुई हो तो सब सुख देने वाली मानी गई है.....
ऊपर को उठी हुई ग्रंथि तथा वामावर्त वाली नाभि अशुभ फल देने वाली होती है.
नाखून - लाल-चिकने- सुख मिलता है
कटे-फटे नाखून - दुख मिलता है

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