मंदिर जाएं तो जरूर ध्यान रखनी चाहिए ये बातें


जब भी श्रद्धालु कोई मनोकामना लेकर देवालयों में जाते हैं तो वहां कुछ समय बैठते अवश्य है। मंदिर में कैसे बैठना चाहिए इस संबंध में भी विद्वानों द्वारा कुछ बातें बताई गई हैं। ऐसा माना जाता है कि मंदिरों में ईश्वर साक्षात् रूप में विराजित होते हैं। किसी भी मंदिर में भगवान के होने की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। भगवान की प्रतिमा या उनके चित्र को देखकर हमारा मन शांत हो जाता है और हमें सुख प्राप्त होता है। 

यह भी पढ़े : हैरान रह जाएंगे, लड़कियां इसलिए लगाती हैं माथे पर बिंदी

मंदिर में भगवान का ध्यान लगाने के लिए बैठते समय ध्यान रखना चाहिए कि हमारी पीठ भगवान की ओर न हो। इसे शुभ नहीं माना जाता है।मंदिर में कई दैवीय शक्तियां का वास होता है और वहां सकारात्मक ऊर्जा हमेशा सक्रीय रहती है। यह शक्ति या ऊर्जा देवालय में आने वाले हर व्यक्ति के लिए होती है। यह हम पर ही निर्भर करता है कि हम वह शक्ति कितनी ग्रहण कर पाते हैं। 


इन सभी शक्तियों का केंद्र भगवान की प्रतिमा ही होती है जहां से यह सभी सकारात्मक ऊर्जा संचारित होती रहती है। यदि हम भगवान की प्रतिमा की ओर पीठ करके बैठ जाते हैं तो यह शक्ति हमें प्राप्त नहीं हो पाती। इस ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए हमारा मुख भी भगवान की ओर होना आवश्यक है।भगवान की ओर पीठ करके नहीं बैठना चाहिए इसका धार्मिक कारण भी है। 

यह भी पढ़े : मंदिर में प्रवेश पहले क्यों बजाते है घंटी

ईश्वर को पीठ दिखाने का अर्थ है उनका निरादर। भगवान की ओर पीठ करके बैठने से भगवान का अपमान माना जाता है। इसी वजह से ऋषिमुनियों और विद्वानों द्वारा बताया गया है कि हमारा मुख भगवान के सामने होना चाहिए, पीठ नहीं।

Post a Comment

أحدث أقدم