भारतीय टीम के तेज गेंदबाज खलील अहमद के बारे में हम आपको आज कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जिनके बारे में नहुत ही कम लोग जानते है। वैसे तो हर किसी का सपना टीम इंडिया की तरफ से खेलने का होता है। लेकिन इसमें बहुत ही कम लोग सफल हो पाते है। ऐसी ही एक कहानी रही है टीम इंडिया के तेज गेंदबाज़ खलील अहमद की।
अहमद के पिता (जो राजस्थान के छोटे से शहर टोंक में कम्पाउंडर हैं) 2018 में हुए उनके शानदार आइपीएल ऑक्शन को याद करते हैं। सीनियर अहमद यानी खलील अहमद के पिता बताते हैं, "मैं सुबह 7 बजे जगा, एक कप चाय पी और ऑक्शन देखना शुरु किया। मैं इसकी बारी का इंतजार करता रहा और जब इसका नंबर आया तब शाम के 7 बज रहे थे। मैंने पूरा दिन खाना नहीं खाया था और घर में कोई भी नहीं था। मेरे दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, मैं बहुत घबरा रहा था। जब मैंने अंतिम धनराशि (3 करोड़ रुपये) देखी तब मुझे अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था।"
खलील अहमद की बड़ी बहन बताती हैं, "मुझे याद है, मैं एक वलीमा (रिसेप्शन) में थी। हम बस खाना खाना शुरु ही करने वाले थे कि मुझे मेरे कज़िन का फोन आया। जब मुझे मेरे भाई के ऑक्शन के बारे में पता चला, मैं पागलों की तरह हंसने लगी। लोगों को लगा कि मैं पागल हो गयी हूं- वे मुझसे बार-बार पूछने लगे कि क्या हुआ। मुझे याद है उस रात मैंने डिनर भी नहीं किया और परिवार के साथ जश्न मनाने वापस लौट आई!"
जश्न के बारे में क्रिकबज के एक स्पेशल शो में खलील अहमद की बहन आगे बताती हैं, "हम खलील अहमद को प्यार से 'रसगुल्ला' बुलाते थे। इसलिए जब हमें इतनी बड़ी ऑक्शन मिली, मेरे पिता जी रसगुल्लों की ढेर सारी टिन ले आए और हमने पूरे मालपुरा गांव, जो हमारा पैतृक गांव भी है, उसमें रसगुल्लों के ये टिन बांटे।"
खुद खलील अहमद भी याद करते हुए बताते हैं, "ऐसा ही जश्न भारतीय टीम में मेरे चुने जाने पर भी मनाया गया था। टोंक से कई लोग, हमारे रिश्तेदार से लेकर करीबी दोस्त और यहां तक कि ऐसे लोग भी जिन्हें मैं जानता तक नहीं था, मेरे घर आए। मुझे फूलों की माला पहनाई गई। मुझे ढेर सारे फूल और मिठाइयां दी गई थीं। छोटे से शहर में ऐसा ही होता है। एक इंसान की सफलता पूरे समुदाय की सफलता होती है। मुझे याद है, उस दिन मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा था।"

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