इससे पहले इसरो के अधिकारी मिशन की कामयाबी की कामना लगातार कर रहे थे। लैंडर विक्रम बड़े ही आराम से नीचे उतर रहा था। विक्रम ने सफलतापूर्वक अपना रफ ब्रेक्रिंग चरण पूरा किया और अच्छी स्पीड से चांद की सतह की ओर बढ़ रहा था, लेकिन जब चांद की सतह 2.1 किलोमीटर दूर थी तब यह घटना हो गई। इसरो के एक वैज्ञानिक के मुताबिक, लैंडर का नियंत्रण उस समय समाप्त हो गया होगा, जब नीचे उतरते समय उसके थ्रस्टर्स को बंद किया गया होगा। हालांकि 978 करोड़ रुपये लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ है।
मिशन का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा नाकामयाब हुआ है जिसमें विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर थे जबकि शेष 95 प्रतिशत - यानी चंद्रयान -2 ऑर्बिटर-अभी भी सफलतापूर्वक चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है। पूरे एक साल तक यह ऑर्बिटर चांद की तस्वीरें इसरो को भेजता रहेगा। साथ ही ऑर्बिटर विक्रम की स्थिति की भी तस्वीरें भेजेगा। असफलताओं और असफलताओं से सीखना अंतरिक्ष की यात्रा का एक हिस्सा है।



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