गौरतलब है कि बीते कई दिनों से पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं क्रमशः महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने अपने-अपने बयानों से राज्य में एक किस्म के डर के माहौल को जन्म दिया है। शनिवार को राज्यपाल से मुलाकात के बाद नेशनल कांफ्रेस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सरकार से संसद में बयान देने की मांग की थी, तो रविवार को महबूबा मुफ्ती ने राज्य के नेताओं की सर्वदलीय बैठक कर धारा 370 और 35-ए पर सरकार को चेतावनी दे डाली। हालांकि दोनों ही ने राज्य में शांति बनाए रखने की अपील की।
एक तरफ जहां राज्य के नेता अमरनाथ यात्रा के अचानक रद्द किए जाने और सुरक्षा बलों के अतिरिक्त जमावड़े की अलग-अलग व्याख्या कर रहे थे, वहीं दिल्ली में भी जम्मू-कश्मीर को लेकर हलचल तेज रही। रविवार को गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल समेत केंद्रीय गृह सचिव और आईबी सरीखी संस्था के प्रमुख शामिल हुए थे। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। इसके पहले अजित डोभाल अचानक ही गुप्त तौर पर जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आए थे. इस दौरान उन्होंने राज्य के शीर्ष अधिकारियों से बैठक की थी।
अजित डोभाल के गुप्त दौरे के बाद ही जम्मू-कश्मीर में हालात तेजी से बदलने शुरू हुए। एक तरफ अतिरिक्त सुरक्षा बलों, जिनकी संख्या लगभग 38 हजार बताई जा रही है, की तैनाती की गई। वहीं सरकार के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई। राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में 40 कंपनी सीआरपीएफ तैनात की गई है। रविवार को ही यह खबरें भी सामने आईं कि गृह मंत्री अमित शाह भी जल्द ही कश्मीर दौरे पर जाने लगे हैं।
रविवार रात कई थानों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। साथ ही धारा 144 लागू कर दी गई है। इस बार गौर करने वाली बात यह है कि राज्य प्रशासन ने 'नो मूवमेंट' भी लागू कर दिया है। यानी लोगों के लिए रोजमर्रा के कामों के लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है। यहां तक कि सोमवार से शुरू हो रही परीक्षाएं भी टाल दी गई है। स्कूल-कॉलेज बंद करने के साथ ही कर्फ्यू पास जारी करने से आमजन में कुछ बड़ा होने का डर और घर कर गया है। श्रीनगर में रविवार रात को धारा 144 लागू कर दी गई थी तो जम्मू में भी सुबह 6 बजे से प्रभावी हो गई है। कश्मीर के अलावा जम्मू, कठुआ, ऊधमपुर, रियासी, किश्तवाड़, रामबन, राजौरी, पुंछ में सुरक्षा बेहद कड़ी है। ऐसे में आने वाले कुछ घंटे राज्य के लिए खासकर कैबिनेट बैठक के मद्देनजर खासे अहम साबित हो सकते हैं।

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