दुनिया का एकमात्र मंदिर जहां पर घर से भागे हुए प्रेमियों को मिलती है सुरक्ष्या!!


आजतक आपने कितनी ही प्रेम मोहब्बत की कहानिया सुनी होंगी जो कभी सफल नहीं हुई। जैसे की हीर राँझा , और लैला मजनू। इन कहानियों में प्रेमी प्रेमिकाओ को न जाने कितनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ा और जमाने ने इनको ठुकरा दिया था। लेकिन दुनिया में एक ऐसा मंदिर है जहां पर घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देने के लिए माना जाता है। हिमाचल के कुल्लू के शांघड़ गांव के देवता शंगचूल महादेव का मंदिर घर से भागे प्रेमी जोड़ों को शरण देने के लिए माना जाता है। ये मंदिर महाभारत काल जितना प्राचीन है। आइए जानते है इस मंदिर के बारे में।

पांडव कालीन शांघड़ गांव में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। इन्ही में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर। शंगचूल महादेव की सीमा में किसी भी जाति के प्रेमी युगल अगर पहुंच जाते हैं तो फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा रहते हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
  
यहां तक की प्रेमी युगल के परिजन भी उससे कुछ नहीं कह सकते। शंगचुल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र करीब 100 बीघा का मैदान है। जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी युगल पहुंचता है वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है। यहां भागकर आए प्रेमी युगल के मामले जब तक सुलझ नहीं जाते तब तक मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं।  

बहुत ही जबरदस्त है इस मंदिर के नियम कायदे - अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान लेकर आना भी मना है। न कोई हथियार लेकर यहां प्रवेश कर सकता है और न ही किसी प्रकार का लड़ाई झगड़ा तथा ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता है। यहां देवता का ही फैसला मान्य होता है।
  
क्या है इसके पीछे की मान्यता -  गांव में ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रूके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए यहां आ गए। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ बिगाड़ सकता। महादेव के डर से कौरव वापस लौट गए। तब से लेकर आज तक जब भी कोई समाज का ठुकराया हुआ शख्स या प्रेमी जोड़ा यहां शरण लेने के लिए पहुंचता है, महादेव उसकी देखरेख करते हैं।

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