आज तस्वीरों के माध्यम से आपको दिखाते है भारत के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया की सच्चाई… शायद नसीब की मारी इन लड़कियों की हालत देखकर अगली बार इन्हें देखकर मुहं से गाली नहीं शायद सांत्वना के दो बोल निकल जाए।
कोलकाता के सोनागाछी क्षेत्र की एक अँधेरी और बदनाम गली। छोटे छोटे कमरों के सामने बैठ कर अपने ग्राहकों का इंतजार करती वेश्याएं। चिड़ियाघर में पिंजरे में कैद जानवरों की हालत से भी बदतर हालत होती है। सोनागाछी में इन छोटे छोटे दडबे जैसे पिंजरों में कैद लड़कियों की।
कहने को तो वेश्यावृत्ति का व्यापार बहुत बड़ा है पर अधिकतर पैसा वेश्याओं को नहीं उनके मालिकों, दलालों की जेबों में जाता है। वेश्याओं को तो बस मिलता है कुछ पैसा और ढेर सारा अपमान और परेशानियाँ।
सोनागाछी की बहुत सी वेश्याएं पडौसी देश बांग्लादेश से आती है। अत्यधिक गरीबी की वजह से परिवार पालने के लिए वो भारत इस उम्मीद से आती है कि उन्हें यहाँ कोइ रोजगार मिल जायेगा।
लेकिन दलालों और जिस्मफरोशी के ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर वो जीते जी नरक में धकेल दी जाती है देखा आपने जिन्हें हम गालियाँ देते रहते है वो बेचारी वेश्याएं किस नरक में रहती है।
वो भी आपकी हमारी तरह इंसान है उन्हें भी जीने का हक है। लेकिन इस धंधे में वो बस एक जिंदा लाश बनकर रह जाती है। जहाँ दिन रात अंधेरी कोठरियों में उनका जिस्म कुचला जाता है।
कहने को तो वेश्यावृत्ति का व्यापार बहुत बड़ा है पर अधिकतर पैसा वेश्याओं को नहीं उनके मालिकों, दलालों की जेबों में जाता है। वेश्याओं को तो बस मिलता है कुछ पैसा और ढेर सारा अपमान और परेशानियाँ।
सोनागाछी की बहुत सी वेश्याएं पडौसी देश बांग्लादेश से आती है। अत्यधिक गरीबी की वजह से परिवार पालने के लिए वो भारत इस उम्मीद से आती है कि उन्हें यहाँ कोइ रोजगार मिल जायेगा।
लेकिन दलालों और जिस्मफरोशी के ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर वो जीते जी नरक में धकेल दी जाती है देखा आपने जिन्हें हम गालियाँ देते रहते है वो बेचारी वेश्याएं किस नरक में रहती है।
वो भी आपकी हमारी तरह इंसान है उन्हें भी जीने का हक है। लेकिन इस धंधे में वो बस एक जिंदा लाश बनकर रह जाती है। जहाँ दिन रात अंधेरी कोठरियों में उनका जिस्म कुचला जाता है।






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