1. अत्याधिक साहस से भरपूर
स्त्रियों के बारे में रावण ने कहा है की स्त्रियों में अत्यधिक साहस होता है कई मौको पर वो इतना ज्यादा साहस दिखा देती है की जिसके कारण बाद में उन्हें अपने सगे-सम्बन्धियो के आगे पछताना पड़ जाता है ! आगे रावण ने कहा, अत्याधिक साहस होने के कारण स्त्रियाँ यह फैसला नहीं ले पाती की वो इस साहस का उपयोग किस जगह और किस तरह करे, बिना समझे प्रयोग किया गया यही अत्यधिक साहस दुःसाहस बन जाता है !
2. ज्यादा जुठ बोलना
रावण ने मंदोदरी को कहा की स्त्रियों के अंदर दूसरा सबसे बड़ा अवगुण जुठ बोलने का होता है ! स्त्रियां सबसे ज्यादा जुठ बोलती है बात बात पर जुठ बोलती है ! और स्त्रियों की यही जुठ बोलने की आदत उनकी ज्यादातर परेशानियों का सबब बनती है ! स्त्रियाँ एक बात हमेशा भूल जाती है की जुठ ज्यादा दिन नहीं छुपता और एक ना एक दिन जुठ का सच सामने आ ही जाता है जिसके कारण उनकी परेशानियाँ चालु हो जाती है !
3. हद से ज्यादा चंचलता
रावण के अनुसार स्त्रियों में चंचलता भाव पुरुषो से काफी अधिक होता है और यही कारण है की स्त्रियाँ ज्यादा देर एक बात पर नहीं टिक पाती है ! स्त्रियों की इसी चंचलता के कारण उनके विचारो में बार बार बदलाव आता रहता है और वो विपरीत परिस्थितयो में सही निर्णय नहीं कर पाती है !
4. माया की रचना करना
रावण ने मंदोदरी को चौथी बात बताते हुए कहा की स्त्रियाँ अपना मनचाहा काम करवाने के लिए माया रचती है और अपना कोई भी काम करवाने के लिए प्रलोभन देने से नहीं चुकती है वो अपना काम करवाने के लिए जल्दी ही रूठ भी जाती है और उतनी ही जल्दी से मनाती भी है ! यह एक प्रकार की माया ही है !
5. जल्दी डर जाना
रावण मंदोदरी को पांचवी बात बताते हुए कहता है की कई मौको पर स्त्रियाँ बिना किसी कारण के भी अत्यधिक डर जाती है और उनके इस स्वभाव से उनके कई बने हुए काम भी आखिरी समय पर बिगड़ जाते है ! स्त्रियाँ बाहर से कितना भी साहस दिखाने की कोशिश करे पर कई मौको पर वो अंदर से बहुत ही डरी हुई होती है !
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