अगर आप भी प्रेग्नेंसी चाहती हैं, तो ये तरीके हैं बड़े काम के!


गर्भधारण के लिए जहां तक रही पोजिशन का बात तो कंसीव​ करने में इसकी कोई बहुत बड़ी भूमिका नहीं होती। हां, मेल का सुपीरियर पोजिशन बेहतर माना जाता है। साथ ही, इंटरकोर्स के दौरान इजेकुलेशन के बाद महिला को पीठ के बल लेटकर अपने दोनों घुटनों को 15 मिनट के लिए मोड़कर ब्रेस्ट के ऊपर रखना चाहिए। इससे स्पर्म के ज्यादा से ज्यादा संख्या में यूटरस और फैलोपियन ट्यूब में पहुंचने की संभावना रहती है। इससे कंसीव करने में आसानी होती है।

जहां तक बात ल्यूब्रिकेन्ट के उपयोग की है तो ऐसा देखा गया है कि इस वजह से स्पर्म की स्पीड कई बार कम हो जाती है और कभी-कभी तो रुक भी जाती है। इससे प्रेग्नेंसी में बाधा भी​ पैदा​ हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि​ ​ल्यूब्रिकेंट का उपयोग न करें। अमूमन माहवारी 28 दिन पर होती है। जहां तक कंसीव करने के लिए सबसे बेहतरीन समय की बात है तो दूसरा और तीसरा सप्ताह इसके लिए सबसे अच्छा है। उदाहरण के लिए​, ​अगर महावारी 1 तारीख को हुई है तो 8 से 21 तारीख के बीच प्रेग्नेंसी की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।

अगर आप गाइनेकॉलजिस्ट के पास जाएंगी तो वह आपको एग निकलने की सही तारीख भी बता सकती है।​ इससे आपको प्रेग्नेंसी प्लान करने में काफी आसानी रहेगी।

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