इसके कारण किशोर सार्वजनिक स्थानों पर अक्सर डेटिंग करते नजर आते हैं। किशोर आमतौर पर डेटिंग को एक फैशन, रोमांच और एडवेंचर के तौर पर लेते हैं। कुछ किशोर टीनेज डेटिंग को शारीरिक संबंधो से जोडते हैं। लेकिन शायद उनको यह नहीं पता होता है कि डेटिंग एक-दूसरे को जानने और समझने के लिए की जाती है न कि शरीरिक जरूरतों की पूर्ती के लिए। टीनेज डेटिंग अगर भावावेश में की जाती है तो उसके कई गलत प्रभाव पडते हैं। किशोरावस्था में पूरी तरह से मानसिक और शारीरिक विकास नहीं होता है जिसके कारण लडके और लडकियां डेटिंग को एक ट्रेंड की तरह समझते हैं।
इस दौरान वे लोग एक-दूसरे से शारीरिक तौर पर जुडऩे की कोशिश करते हैं जो कि लड़के और लडकी दोनों के विकास के लिए हानिकारक है क्योंकि इस उम्र में किशोरों को कई जानकारी नहीं होती है। इसीलिए उनके दिमाग में कहीं न कहीं डर भी बना रहता है। टीनेज डेटिंग का सबसे ज्यादा प्रभाव लड़के-लड़कियों के मानसिक विकास पर पडता है। क्योंकि किशोर अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। डेटिंग के चक्कर में किशोर गलत कदम उठाते हैं और लडकियां अक्सर किशोवास्था में ही गर्भ धारण कर लेती हैं।
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