"महामृत्युंजय मंत्र" के जप करने से मिलता हैं मनवांछित फल, रखें इन बातों का विशेष ध्यान


"महामृत्युंजय मंत्र" भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है,मन्त्र के जप से कही ज्यादा जरूरी है इस मंत्र की शक्ति पर विश्वास करना। अगर इंसान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का जप करता है तो उसे निश्चित रुप से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान...

1. महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण सही तरीके से और शुद्धता के साथ करें। इस मंत्र के जप में एक शब्द की भी गलती भारी पड़ सकती है।

2. इस मंत्र के जप के लिए एक निश्चित संख्या निर्धारित करें। आप धीरे.धीरे जप की संख्या को बढ़ा सकते हैं लेकिन इसे कम न करें।


3. इस मंत्र का जप धीमे स्वर में करना चाहिए। जप करते समय इसका उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए।

4. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि महामृत्युंजय जप के दौरान धूप.दीप जलते रहना चाहिए।

5. इस मंत्र का जप केवल रुद्राक्ष की माला से ही करें। माला को गौमुखी में रखकर उससे जप करें और जप पूरा हो जाने के बाद माला गौमुखी से बाहर निकालें।

6. इस मंत्र का जप उसी जगह पर करें जहां पर भगवान शिव की मूर्ति, प्रतिमा या महामृत्युमंजय यंत्र रखा हो।


7. इस मंत्र का जप हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करें और जितने भी दिन का यह जप हो उतने दिन तक मांसाहार का सेवन न करें।

8. पुत्र की प्राप्ति के लिए, उन्नति के लिए, अकाल मृत्यु से बचने के लिए और अन्य सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सवा लाख की संख्या में इस मंत्र का जप करना अनिवार्य है।

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