आज वो शुभ घड़ी आ गई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी श्रीराम जन्मभूमि परिसर में पारिजात का पौधा लगाएंगे। आखिर क्या है इस पौधे का महत्व और खासियत जिसकी वजह से इसे भूमि पूजन समारोह का हिस्सा बनाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस दिव्य वृक्ष के बारे में....
जनिये पारिजात की खासियतें
- हिन्दू धर्म में इस वृक्ष का बहुत महत्व माना जाता है, ऐसी भी मान्यता है कि पारिजात को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकान मिट जाती है।
- कहा जाता है कि मां लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं और पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को ये फूल चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं।
- पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है, यानि जो फूल पेड़ से गिर जाते हैं उन्हीं को पूजा में चढ़ाया जाता है।
- एक मान्यता ये भी है कि 14 साल के वनवास के दौरान सीता माता हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थीं।
- परिजात एक पुष्प देने वाला वृक्ष है इसे हरसिंगार, शेफाली, शिउली आदि नामो से भी जाना जाता है इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है।
- इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है, यह पूरे भारत में पैदा होता है।
- यह विशेषकर मध्यभारत और हिमालय की नीची तराइयों में ज्यादातर पैदा होता है।
- इसके फूल बहुत सुगंधित, सफेद और सुन्दर होते हैं जो रात को खिलते हैं और सुबह मुरझा कर गिर जाते हैं।
- हारसिंगार बुखार को खत्म करता है। तथा स्वाद में यह कडुवा होता है।
- शरीर में वीर्य की मात्रा को बढ़ाता है।
- इसकी छाल को अगर पान के साथ खाये तो खांसी दूर हो जाती है।
- इसके पत्ते दाद, झांई और छीप को खत्म करते हैं।
- इसके फूल ठण्डे दिमाग वालों को शक्ति देता है और गर्मी को कम करता है।
- हारसिंगार की जड़ व गोंद भी वीर्य को बढ़ाती है।
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