सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू महिला को अपने पिता की संपत्ति में भाई के समान ही हिस्सा मिलेगा। कोर्ट ने अपनी अहम टिप्पणी में कहा कि बेटियां हमेशा बेटियां रहती हैं। बेटे तो बस विवाह तक ही बेटे रहते हैं। यानी 2005 में संशोधन किए जाने से पहले भी किसी पिता की मृत्यु हो गई हो तब भी बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटे या बेटों के बराबर ही हिस्सा मिलेगा।
बता दें कि 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1965 में संशोधन किया गया था। इस संशोधन के तहत पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबरी का हिस्सा देने का प्रावधान है. इसके अनुसार कानूनी वारिस होने के बाद पिता की संपत्ति पर बेटी का भी उतना ही अधिकार है जितना कि बेटे का। इसका विवाह से कोई लेना-देना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी में कहा कि बेटियां पूरी जिंदगी माता-पिता को प्यार करने वाली होती हैं. एक बेटी अपने जन्म से मृत्यु तक माता-पिता के लिए प्यारी बेटियां होती हैं। जबकि विवाह के बाद बेटों की नीयत और व्यवहार में बदलाव आता है लेकिन बेटियों की नीयत में नहीं। विवाह के बाद बेटियों का प्यार माता-पिता के लिए और बढ़ता ही जाता है। इस मामले में इस नजरिए से सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम है कि जब पूरी दुनिया में लड़कियां लड़कों के बराबर अपनी हिस्सेदारी साबित कर रही हैं, ऐसे में सिर्फ संपत्ति के मामले में उनके साथ यह मनमानी और अन्याय ना हो।

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