जन्माष्टमी का व्रत रख रहे है तो इन बातों रखें का विशेष ध्यान!


हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु ने धरती पर कृष्ण जी के रूप में अपना आंठवा अवतार लिया था। इस दिन लोग अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते है और उपवास रखते है। जन्माष्टमी के दिन उपवास रखने का ख़ास महत्व है। अगर आप भी जन्माष्टमी के दिन व्रत रख रहे है तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें।


उपवास या व्रत मुख्यत: तीन प्रकार का होता है जिसमें निराहार, फलाहार और दुग्धाहार होता है। निराहार व्रत में व्यक्ति को भोजन के बिना रहना होता है वहीं फलाहार में आप केवल फलों का सेवन कर सकते है। दुग्धाहार में सिर्फ गाय के दूध का सेवन किया जाता है। इसमें से निराहार व्रत को सबसे अच्छा माना जाता है जो कि निर्जल और सजल दोनों तरीकों से किया जा सकता है। निर्जल व्रत में पानी भी नहीं पिया जाता है जबकि सजल व्रत में आप पानी पी सकते है। सजल व्रत में चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं कर सकते है।


अगर आप फलाहार व्रत कर रहे है तो आपके लिए सेव, अमरुद या पपीते का सेवन करना सबसे अच्छा रहेगा। दुग्धाहार में आप केवल गाय के दूध का सेवन कर सकते है। दुग्धाहार में भी आप चाय या कॉफ़ी का सेवन नहीं कर सकते है। व्रत करने के साथ ही अगर आप व्रत का समापन सही से नहीं करते है तो आपको व्रत करने के अच्छे परिणाम नहीं मिलते है। जन्माष्टमी का व्रत आधी रात कृष्ण जी के जन्म के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत को खोलने में आपको ज्यादा भोजन खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा व्रत खोलने के लगभग 12 घंटों तक आपको कुछ भी खाने से बचना चाहिए।

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