इहाना ने इस बारे में कहा, "मैं शीतल का किरदार निभा रही हूं जो पेशे से एक नर्स है। उसकी जिंदगी में उस वक्त एक दुखद मोड़ आता है जब, जिस अस्पताल में वह काम करती है, वहां उसके साथ दुष्कर्म होता है। इस नृशंस यौन दुराचार से बचने के बाद उसे अगले चार दशकों तक अचेतन अवस्था (जिसमें दिमाग लंबे समय तक काम करना बंद कर देता है) में रहना पड़ता है।"
इहाना ने आगे कहा, "यह एक ऐसी औरत की कहानी है जिसके साथ बर्बरतापूर्वक शारीरिक दुष्कर्म किया जाता है और न्याय का इंतजार जिसे लंबे समय तक रहता है।"
इहाना ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि वह अरुणा रामचंद्र शानबाग का किरदार नहीं निभा रही हैं, लेकिन यह कहानी कहीं न कहीं उस मामले से प्रेरित है, लेकिन यह किसी भी तरीके से कोई बायोपिक नहीं है।




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