किसी भी रिश्ते में तारीफ और बुराई के बीच संतुलन होना चाहिए। लेकिन अधिकतर दंपति के बीच बातचीत का सिलसिला ही बुराई पर शुरू होता है। जैसे कि तुमने मेरे घरवालों के साथ गलत तरीके से बात की या फिर तुमने आज खाने में नमक ज्यादा डाल दिया। इस तरह की बातें एक सीमित समय तक ही कोई बर्दाश्त कर सकता है। क्योंकि उसके बाद साथी के दिल में इस बात की गांठ पड़ जाती है और वो धीरे-धीरे दूर होने लगता है।
ज्यादातर देखा गया है कि पति-पत्नी के रिश्ते में जो बात करने में तेज होता है। जिसे बातों को तर्क देकर अपनी बात कहना आता है तो वो हर बात की बहस में जीत जाता है। जिस वजह से दूसरा पार्टनर धीरे-धीरे बहस में पड़ता ही नहीं है। उसे लगता है कि अगर झगड़े होंगे तो वो ही जीतेगा। इससे अच्छा है कि चुप रहें।
आप पार्टनर से कोई जरूरी बात कर रहें हैं और वो उस बात को कर सकता है लेकिन उसे नजरअदांज करें तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। अगर पार्टनर के ऊपर आपके किसी इमोशन का असर ही न पड़े और वो ऐसा दिखाए मानो कुछ हुआ ही न हो तो फिर दिल में ठेस लगना स्वाभाविक है। रिश्ते में इस तरह की परिस्थितियां दूरी और एक दूसरे के प्रति प्यार में कमी की वजह बन जाती हैं।
आपका पार्टनर परेशान है, दुखी है या फिर बीमार है और आप उसके ऊपर ध्यान नहीं दे रहें है। तो ये सबसे बड़ी दरार की वजह है। क्योंकि जीवनसाथी ही एक दूसरे से ये उम्मीद करते हैं कि किसी मुश्किल घड़ी में वो हमारा साथ देंगे।





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