काले घोड़े की नाल का आकार अंग्रेजी के U अक्षर के जैसा होता है। यह मजबूत लोहे की बनी होती है। इसका प्रमुख कार्य घोड़े के पैर को सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही कहा जाता है कि जिस तरह घोड़े की नाल घोड़े के पैर की सुरक्षा करती है उसी तरह यह घर की भी सुरक्षा करती है। यही कारण है कि लोग इसे अपने मुख्य द्वार पर लगाते हैं। और इसके लगाने से घर में किसी प्रकार की नाकारात्मक उर्जा प्रवेश नहीं कर पाती है।
घोड़े की नाल के छल्ले का उपयोग हर क्षेत्र में बहुत ही शुभ माना जाता है। सामान्यतया इसका प्रयोग शनि के दुष्प्रभावों और बुरी आत्माओं से बचने के लिए किया जाता है। इसलिए इसे शनि का छल्ला भी कहा जाता है। इसे दाहिने हाथ की माध्यम अंगुली में धारण करना अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसी उंगली के नीचे शनि पर्वत होता है। जो व्यक्ति इसे धारण करता है उसके जीवन में सुख संपत्ति और समृद्धि आती है।
शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति हेतु लोहा धारण किया जाता है, लेकिन यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती। काले घोडे की नाल, जो नाल खुद ही घोडे के पैरों से निकल गई हों, उस नाल को शनिवार को सिद्ध योग में प्राप्त कर उपयोग करना चाहिए। व्यवसाय में तरक्की के लिए घोडे की नाल को शनिवार को प्राप्त कर, उसका शुद्धिकरण करके व्यापारिक प्रतिष्ठान में ऐसी जगह लगाया जाता है। जहां से प्रत्येक ग्राहक को वह स्पष्ट दिखाई दे। नाल को इस प्रकार लगाया जाता है कि उसका खुला भाग ऊपर की ओर रहे।




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