शोध के मुताबिक रोने से भावनात्मक संतुलन बरकरार रहता है। जैसे खुशी के वक्त हंसी आती है, वैसे ही मुश्किल वक्त में रोना भी स्वाभाविक क्रिया है। रोने से तनाव अपने आप छूमंतर हो जाता है। साथ ही तनाव के कारण हमारे शरीर में जमा टॉक्सिन रोने के बाद अपने आप धुल जाते हैं। यह शोध 'एशियावन' में प्रकाशित हुआ है जिसमें यह बात बताई गई है कि भावुक होकर रोने से हमारा कोर्टिसोल स्तर बढ़ता है। हम जब भावनाओं के ज्वार में बहकर आंसू बहाते हैं तो कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है और इससे हमारा वजन थोड़ा कम होता है। इसके साथ ही शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते है।
इस शोध में सामने आया कि जब आप आंसू बहाते है तो आपके शरीर में फैट रुक नहीं पता है क्योंकि स्ट्रेस पैदा करने वाले हार्मोंस रोते ही बाहर निकल जाते है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बेवजह रोने से बचे। इससे आपको कोई लाभ नहीं मिलागे। जब रोएं तो भावनाओं के साथ इसमें कोई फिल्म या फिर रिश्तों के लेकर कुछ ऐसे पल जो आपको रोने में मजबूर कर दें। वो चीज करें।
अब इस शोध में विशेषज्ञों ने भी बताया कि आखिर किस समय रोना सबसे बेस्ट होता है। तो आपको बता दें कि शाम को 7 बजे से लेकर 10 बजे के बीच रोने से ही वजन कम होता है। हर किसी को रोना पसंद नहीं होता है लेकिन इस तरह से रोना आफकी सेहत के लिए अच्छा होगा। तो फिर देर किस बात की अगर आप भी करना चाहते है वजन कम तो उठाएं टिश्यू और अपनी फीलिंग के साथ रोएं।

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