अगर पीरियड्स से जुड़े इन मिथ पर आप भी करती हैं भरोसा तो सच्‍चाई जानें

पीरियड्स के दिनों में पौधों में पानी डालने से वह मुरझा जाते हैं, किचन में घुसने की मनाही होती हैं, मंदिर नहीं जाना चाहिए। क्‍योंकि लड़की को अशुद्ध माना जाता है। इसके अलावा एक्‍सरसाइज करने और कुछ चीजों को खाने से भी मना कर दिया जाता है। लेकिन मुझे आज यह बात समझ में नहीं आई कि पीरियड एक नॉर्मल प्रोसेस है जिससे एक महिला को हर महीने गुजरना होता है। लेकिन हमारे भारतीय समाज में इसे एक बीमारी की तरह ट्रीट किया जाता है। पीरियड को अशुद्ध माना जाता है। इसलिए आज हम पीरियड्स से जुड़े कुछ मिथ और उनसे जुड़े सच के बारे में जानेंगे


पीरियड्स के दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए।
भारत जैसे देश में आज भी यह मिथ फैला है कि पीरियड्स के समय पूजा नहीं करनी चाहिए। साथ ही उन्‍हें मंदिर जाने, धार्मिक कार्यों में भाग लेने और यहां तक की किचन में जाने की अनुमति नहीं होती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दौरान महिलाएं अशुद्ध माना जाता हैं। लेकिन यह मानना बिल्‍कुल गलत है। जिस भगवान ने महिलाओं को यह प्रकृति दी है वह किसी महिला के छूने मात्र से कैसे अशुद्ध हो सकते हैं।


पीरियड्स के दौरान महिलाएं कंसीव नहीं कर सकती हैं।
ऐसा माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। लेकिन यह एक मिथक है, क्‍योंकि इस दौरान गर्भधारण करना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि पुरुष शुक्राणु महिला वेजाइना में लगभग 5 दिनों तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए अगर पीरियड्स के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाते हैं प्रेग्‍नेंट होने की संभावना खत्‍म नहीं होती है।


पीरियड के दौरान अचार छूने से अचार खराब हो जाता है। 
यह सबसे बड़ा मिथ है। अचार सिर्फ पानी से भीगे हाथ से छूने से खराब होते हैं। अचार को कैसे पता कि महिला को पीरियड्स हो रहे हैं, हां-हां-हां।


पीरियड्स के दौरान एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए।
अगर आपको एक्सरसाइज करने की आदत है तो आप अपने पीरियड्स में भी एक्सरसाइज कर सकती हैं। एक्‍सरसाइज ब्‍लड और ऑक्सीजन के प्रवाह को सुचारु कर पेट में दर्द और ऐंठन को दूर करे में हेल्‍प करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार हर हफ्ते 150 मिनट या कम से कम 75 मिनट एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। हां वो बात अगल हैं कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स में बहुत ज्‍यादा दर्द होता हैं जिसके चलते वह एक्‍सरसाइज नहीं कर पाती हैं।


पीरियड एक हफ्ते में खत्म हो जाना चाहिए।
हर महिला की बॉडी अलग होती है और वह अलग तरीके से काम करती है। इसलिए सभी की मेंसुरेशन साइकिल अलग होती है। बदलती उम्र के अनुसार भी इस साइकिल में बदलाव आते रहते हैं। किसी महिला को पीरियड्स कम दिन तो किसी को ज्‍यादा दिनों तक होते हैं।


पीरियड में निकलने वाला ब्‍लड गंदा होता है।
हालांकि नसों में बहने वाला ब्‍लड से यह अलग होता है लेकिन पीरियड के दौरान निकलने वाला ब्‍लड भी नॉर्मल ही होता है। वेजाइना से निकलने वाले इस ब्लड में वेजाइना के टिश्यू, सेल्स और एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कारण बच्चेदानी में ब्‍लड और प्रोटीन की बनी परत के टुकड़े होते हैं। ये सारी चीजें पीरियड के पहले बच्चेदानी में जमा होते हैं। क्‍योंकि इनकी जरूरत नहीं होती हैं इसलिए पीरियड्स के ब्‍लड के रूप में बॉडी से बाहर निकल जाते है।

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