हम जिस फल की बात कर रहे हैं वो कोई और फल नहीं बल्कि गूलर का फल हैं और यह फल पको अक्सर सड़क के किनारे या फिर मंदिर के आस-पास मिल ही जाते हैं। दरअसल गूलर के पेड़ को देवताओं का वास माना जाता हैं, इसलिए यह पेड़ मंदिरों के परिसर में नजर आते हैं। गूलर का पूरा पेड़ दूध से भरा होता हैं इसलिए यदि उसे कहीं से भी काटा जाए तो उस जगह से दूध निकलने लगता हैं।
गूलर का फल कच्चा और पका दोनों तरह से खाया जाता हैं। दरअसल गूलर के कच्चे फलों से सब्जी भी बनाई जाती हैं और जब गूलर कच्चा होता हैं तो यह हरे रंग का होता हैं लेकिन जब यह पाक जाता हैं तो बिल्कुल गुलाबजामुन की तरह नजर आता हैं। ऐसे में आज हम आपको इसके आयुर्वेदिक फायदों के बारे में बताने वाले हैं।
वर्तमान में मधुमेह यानि डायबिटीज़ की बीमारी हर किसी को हो जा रही हैं और इस बीमारी के होने के बाद इंसान का शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता हैं। इस बीमारी में पानी के साथ गुलर के फल को पीस कर नियमित सेवन करने से आपको इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता हैं। ऐसे ही यदि आप दांत के रोग से परेशान हैं तो आप गूलर के 2-3 फल लेकर पानी में उबाल ले और इसका काढ़ा बनाकर रोज कुल्ला करे तो इससे आपके दांत व मसूढ़े स्वस्थ रहेंगे और मजबूत भी हो जायेंगे।
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