वंदे भारत एक्सप्रेस शनिवार सुबह 6 बजे दिल्ली रेलवे स्टेशन से चली और दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर वाराणसी पहुंच गई। दिल्ली से प्रयागराज तक वंदे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल पहले ही हो चुका है. पिछले वर्ष दिल्ली से प्रयागराज के बीच इसका ट्रायल किया गया था। देश की पहली बिना इंजन वाली 16 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस को भारतीय इंजीनियरों ने 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनाया है।
इस ट्रेन पर 97 करोड़ की लागत आई है और इसे इंटिगरल कोच फैक्टरी चेन्नई ने बनाया है। वंदे भारत 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेगी जिसमें कुल 16 कोच जो चेयरकार हैं, 16 में से 12 कोच नॉर्मल चेयरकार हैं। हर बोगी में 78 सीटें हैं। इसके अलावा 2 कोच एक्जिक्यूटिव टाइप हैं जिनमें 25 सीटें हैं. दो कोच ड्राइविंग कोच हैं जो नॉर्मल चेयर कार टाइप के हैं।
ट्रेन में ऑटोमैटिक दरवाजे है जहां स्लाइडिंग सीढ़ियां है जिससे उतरने में आसानी होगी। इतना ही नहीं ट्रेन को कंट्रोल और रिमोट मॉनिटर के लिए कंप्यूटर भी लगे हैं। एक कोच से दूसरे कोच में जाने के लिए गैंगवे पूरी तरह सील है जिससे यात्रियों को परेशानी नहीं होगी और पूरी ट्रेन के साथ ही ड्राइवर का केबिन भी वातानुकूलित है।
रेलवे बोर्ड ने देश की पहली सेमी हाईस्पीड वंदे भारत को चलाने के लिये कानपुर का दावा मंजूर कर लिया है। ये ट्रेन राजधानी दिल्ली से पीएम मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी के बीच चलेगी लेकिन इसके संचालन की जिम्मेदारी कानपुर के पास रहेगी।





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