पहला काम
धन कमाने के बाद जो पहला काम करना जरूरी है, वह है ‘दान’। हमें अपने कमाए धन का कुछ भाग अवश्य दान करना चाहिए। पुराणों में दान से प्राप्त होने वाले पुण्यों के बारे में भी बताया गया है। राजा भर्तृहरि के अनुसार धन का दान जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है उसका भोग करना। यही धन के दो मुख्य उद्देश्य हैं। धन को संचय करना अवश्यक है क्योंकि बुरे समय में धन किसी साथी या करीबी से बढ़कर साथ निभाता है। लेकिन उसका भोग करना भी जरूरी है।
दूसरा काम
शास्त्रों के अनुसार दान करने से उसी व्यक्ति को फल मिलता है, जो दान करते समय किसी बात का घमंड ना करे। हम जिस किसी को भी दान कर रहे हैं, यह दान एक सहायता के रूप में होना चाहिए। कभी भी उस व्यक्ति को यह महसूस नहीं कराना चाहिए कि हम उसपर तरस खाकर उसे कुछ दान कर रहे हैं। यही सच्चा दान है।

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