आसपास के करीब 60 गांवों के लोगों का मानना है कि यदि इस अनुष्ठान के लिए उनकी बेटी का चयन होता है तो उनकी लड़की भग्यशाली है। इस रस्म की शुरूआत होती है पंडित के सामने परेड से जी हां एक पुरूष पंडित के सामने पहले इच्छुक लड़कियां परेड निकाती है उसके बाद वह पंडित उन लड़कियों में से 7 लड़कियों को इस अनुष्ठान के लिए चुनता है। जिसके बाद उन लड़कियों को 15 दिनों तक मंदिर के एक कक्ष में नग्न रखा जाता है लड़कियों को कमर से उपर कुछ भी पहनने की इजाजत नहीं होती वे इन 15 दिनों तक ऐसे ही अर्धनग्न अवस्था में मंदिर के पुजारी की देखरेख में रहती है।
इन 15 दिनों के दौरान लड़कियों को किसी से मिलने की इजाजत नहीं मिलती यहां तक की वे अपने मात-पिता से भी नहीं मिल सकती। पूजा पाठ के इन 15 दिनों तक इन लड़कियों के उपरी हिस्से में सिर्फ फूल माला और जेवर होते है। प्राचीन समय से चली आ रही इस परंपरा में आसपास के 60 गांवों के लोग हिस्सा लेते है।



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