डोमिनिकन रिपब्लिक के एक गांव ला सेलिनास गांव को श्रापित माना जाता है। इस गांव में लड़की की उम्र 12 साल होते ही वह लड़का बन जाती है। दुनिया में ऐसे बहुत से रहस्य हैं, जो सुलझने की बजाय और गहराते जा रहे हैं। गांव की समस्या यह है कि यहां पैदा होने वाली लड़की जब 12 साल की उम्र तक पहुंचती है, तो वह लड़का बन जाती है।
लड़की से लड़का बनने की इस बीमारी से गांव के लोग बेहद हैरान-परेशान व डरे हुए हैं। जब भी गांव में कोई लड़की जन्म लेती है, तो घर में मातम पसर जाता है। गांव में लड़कियों की संख्या भी कम ही है। गांव में बीमारी से ग्रस्त बच्चों को बेहद हेय दृष्टि से देखा जाता है और उन्हें समाज में घृणित समझा जाता है। इन बच्चों को ‘ग्वेदोचे' के नाम से बुलाया जाता है। यह शब्द स्थानीय भाषा में किन्नरों के लिए इस्तेमाल होता है।
इस बीमारी में लड़की के तौर पर पैदा हुए कुछ बच्चों के शरीर में धीरे-धीरे पुरूषों के अंग बनने लगते हैं। उनकी आवाज भी भारी हो जाती है। उनके शरीर में वो बदलाव आने शुरू हो जाते हैं, जो उन्हें धीरे-धीरे लड़की से लड़का बना देते हैं। कई शोधकर्ताओं ने इस बीमारी का उपचार खोजने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि गांव के 90 में से एक बच्चा इस बीमारी से जूझ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन बच्चों में हार्मोनल एंजाइम की कमी के चलते, वह बिना किसी स्त्री या पुरुष अंग के जन्म लेते हैं और बाद में लड़की के तौर पर पैदा हुआ बच्चा पुरुष बनने लगता है।
लड़की से लड़का बनने की इस बीमारी से गांव के लोग बेहद हैरान-परेशान व डरे हुए हैं। जब भी गांव में कोई लड़की जन्म लेती है, तो घर में मातम पसर जाता है। गांव में लड़कियों की संख्या भी कम ही है। गांव में बीमारी से ग्रस्त बच्चों को बेहद हेय दृष्टि से देखा जाता है और उन्हें समाज में घृणित समझा जाता है। इन बच्चों को ‘ग्वेदोचे' के नाम से बुलाया जाता है। यह शब्द स्थानीय भाषा में किन्नरों के लिए इस्तेमाल होता है।
इस बीमारी में लड़की के तौर पर पैदा हुए कुछ बच्चों के शरीर में धीरे-धीरे पुरूषों के अंग बनने लगते हैं। उनकी आवाज भी भारी हो जाती है। उनके शरीर में वो बदलाव आने शुरू हो जाते हैं, जो उन्हें धीरे-धीरे लड़की से लड़का बना देते हैं। कई शोधकर्ताओं ने इस बीमारी का उपचार खोजने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके।
जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि गांव के 90 में से एक बच्चा इस बीमारी से जूझ रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन बच्चों में हार्मोनल एंजाइम की कमी के चलते, वह बिना किसी स्त्री या पुरुष अंग के जन्म लेते हैं और बाद में लड़की के तौर पर पैदा हुआ बच्चा पुरुष बनने लगता है।



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