इस छिपकली को टॉके के नाम से भी जाना जाता है। इसा छिपकली की विशेषता यह है कि यह टॉक के जैसी आवाज निकालती है। इस छिपकली की और भी कई विशेषताएं हैं। यह छिपकली केवल दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे कि बिहार, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाती है। इस गीको छिपकली के शरीर के हिस्सों का प्रयोग एड्स, कैंसर और मधुमेह जैसे रोगों की दवाईयां बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इस छिपकली का उपयोग मर्दानगी बढाने के लिए भी किया जाता है।
इसी कारण से ब्लैक मार्केट में इस छिपकली की कीमत 40 लाख रुपए है। लगातार जंगलों की कटाई के कारण अब इस छिपकली की प्रजाति धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।

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