'मेलऑनलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवार्ड विनिंग मैन्स हेयरड्रेसर माइकल गुरेज़ के पास दो सलून्स हैं। इनमें से एक लंदन और एक बर्लिन में है। माइकल ने लाइफ-चेंजिंग एडवेंचर की शुरुआत 2013 में की। इसके बाद 20 देशों से ज्यादा में जाकर वहां हेयरड्रेसिंग की कला सीखी।
माइकल इस कला में माहिर होने के लिए ग्रीस, उत्तरी इराक के कुर्दिस्तान भी जा चुके हैं। माइकल ने सोचा कि वह तब तक हेयरकट और शेविंग का काम करेंगे और दुनिया घूमेंगे, जब तक कि उनका पैसा खत्म नहीं हो जाता। जिससे कि वह यह देख सकें कि 5,000 साल पुराना यह व्यवसाय एक जगह से दूसरी जगह किस तरह बदलता है।
माइकल की यात्रा की शुरुआत हुई, एथेंस से। इसके बाद वह तुर्की गए। वहां से मध्य-पूर्व के रास्ते भारत आए और फिर पूरे एशिया में भ्रमण किया। उन्होंने सिंगापुर, कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, नेपाल और दुबई में भी अपने व्यवसाय में जुड़े लोगों को देखा, परखा।
इस तरह दुनिया भर के दर्जनों स्थानों पर जाकर वे इस कला में महारथ हासिल करते रहे। इस दौरान उन्होंने कई दिलचस्प यादें और तस्वीरें बटोरी हैं। जिन्हें देखकर आप भी कुछ सबक ले सकते हैं, कि किस तरह एक हेयरड्रेसर भी अपने काम से प्यार कर सकता है। उसके लिए किस हद तक आगे बढ़ सकता है।



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