इस मंत्र की खासियत है कि ये तत्काल प्रभाव देता है। इस मंत्र के शब्द इतने प्रभावशाली हैं कि ये आपकी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए आपके पसंदीदा देवी-देवता का आवाहन करते हैं। तभी ईश्वर स्वयं कार्य के लिए रास्ता बनाते हैं। इस मंत्र के शब्दोच्चारण मात्र से ही ये आपकी रक्षा करता है। ये आपके ऊपर होने वाले जादू-टोने व अन्य तांत्रिक शक्तियों को विफल करता है। ये नजर दोष से भी बचाता है। ये आपके आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर माहौल को सकारात्मक बनाता है।
शाबर मंत्र के मूल प्रवर्तक शिव जी हैं। उन्होंने ये मंत्र माता पार्वती को सुनाया था। इसके बाद बाबा गोरखनाथ और गुरु मछन्दर नाथ ने इस मंत्र का विस्तार किया। उन्होंने इसे नया रूप देकर प्रस्तारित किया। शाबर मंत्र बहुत ही सरल होते हैं। जैसे - ऊं शिव गुरु गोरखनाथाय नम:। ये एक सिद्ध शाबर मंत्र है।
शाबर मंत्र को जपने के लिए खास विशेष विधि-विधान नही है। हालांकि इस मंत्र का जप स्नान के बाद करना उत्तम रहता है। यदि आप सुबह इसका जप करे तो ज्यादा फलकारी होता है और अगर आपके पास समय नही है तो शाम को धुले हुए वस्त्र पहनकर रात्रि के भोजन से पहले इस मंत्र का जप करें।

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