1. गर्भाश्य के बीच ग्रीवा एक मार्ग का काम करती है। संभोग के दौरान ग्रीवा के द्वारा ही गर्भाश्य तक स्पर्म पहुंचते हैं। अगर ग्रीवा में कोई परेशानी हो तो अंडाणुओं का प्रजनन भी रुक जाता है और महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कत आती है।
2. अंडाणुओं के प्रजनन के लिए योनि में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीएच स्तर का बहुत ज्यादा या कम होना अंडाणुओं के प्रजनन में दिक्कतें उत्पन्न करता है।
3. गर्भाश्य फाइब्रॉएड, ऊतकों पर निशान, संक्रमण, फैलोपियन ट्यूब संबंधित कोई समस्या, एंडोमेट्रियोसिस, पॉलिप्स और प्रजनन संबंधित अन्य किसी परेशानी के कारण गर्भधारण करने में देरी आती है।
4. पॉलीसिस्टिक सिंड्रोम गर्भधारण करने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है जिससे गर्भधारण करने में देरी आती है।
5. महिलाओं को कई तरह की सामान्य समस्याएं जैसे अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना, मोटापे, अनियमित माहवारी और सिस्ट बनने के कारण भी गर्भधारण करने में समस्या आती है।
6. 35 उम्र के बाद भी महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या आती है। 35 के बाद महिलाएं आसानी से गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। उम्र बढ़ने पर अंडाणुओं का गुणवत्ता में कमी आती है और अंडाणुओं की संख्या भी घट जाती है।
7. पतली महिलाओं को भी गर्भधारण करने में दिक्कतें आती हैं। यौन राग जैसे गोनोरिया, क्लेमिडिया और पेल्विक इंफ्लामेट्री रोग के कारण भी महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पाती हैं।

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