इतना ही नहीं, 35 साल की उम्र तक आते-आते हर 6 वर्कर में से एक वर्कर अपनी जॉब से खुश नहीं है। वहीं 55 साल से अधिक उम्र वाले वर्कर्स में से एक तिहाई का कहना था कि उन्हें अपने काम के लिए नहीं सराहा गया। जबकि 16% वर्कर्स ने कहा कि वर्कप्लेस में उनका कोई दोस्त नहीं था।
रिसर्च में ये बात भी सामने आई कि जो लोग ऊंची पदवी या रैंक पर होते हैं उन्हें स्ट्रेस अधिक होता है। साथ ही ऐसे लोगों को भी स्ट्रेस अधिक होता है जो अपने करियर में ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाते। हां, ये बात अलग है कि इनकी सैलरी काफी ज्यादा होती है, लेकिन इनकी लाइफ उतनी ही टफ होने लगती है। रिसर्च में अनुसार इस उदासी से बाहर आने का केवल एक ही तरीका है कि वर्क-प्लेस पर दोस्त बनाना इस स्थिति को सुधार सकता है भले ही आप लोगों के पास बाहर घूमने का समय न हो।

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