यथा चतुर्भि: कनकं परीक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनै:।
तथा चतुर्भि: पुरुषं परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।
1.त्याग: किसी भी इंसान की परख के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उस इंसान में त्याग भावना है कि नहीं। त्याग भावना के बिना कोई भी इंसान अच्छा इंसान नहीं होता है। जो लोग दूसरों की खुशियों के लिए अपनी खुशियों का त्याग कर दे वही सही मायने में अच्छा इसंना होता है।
2.चरित्र: दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात है चरित्र। किसी इंसान का चरित्र कैसा है यह निर्भर करता है उसके विचारों पर। जो लोग किसी के लिए कोई दुर्भावना नहीं रखते वो लोग चरित्रवान लोग होते हैं। उनके विचार हमेशा दूसरों की भलाई के लिए होते हैं।
3.अच्छाईयां (गुण): किसी इंसान में क्रोध, झूठ बोलना, अंहकार, अपमान जैसे अवगुण होते हैं तो हमें उनसे दूर रहना चाहिए। इसके अलावा दूसरों का सम्मान करने वाले, सच बोलने वाले और दूसरों की भलाई करने वाले इंसान को ही अच्छा इंसान कहा जाता है।
4.कर्म: किसी इंसान के कर्म ही उसे अच्छा और बुरा इंसान बनाते हैं। जो लोग गलत तरीके से पैसे कमाते हैं और अधार्मिक काम करते हैं उन्हें अच्छा इंसान नहीं माना जाता है।

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