चौमासे में शारीरिक संबंधो पर क्या कहते हैं पुराण के नियम


आषाढ़ महीने में शुक्लपक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी तक के समय को चौमासा और चतुर्मास के नाम से जाना जाता है। इन महीनों में जहां कोई शुभ काम नहीं किए जाने का विधान हैं वहीं खान-पान और यौन संबंध को लेकर भी पुराणों में कई नियम बताए गए हैं....

1. मनुष्य को इन चार महीनों में पलंग पर नहीं सोना चाहिए।

2. जो व्यक्ति पत्ते पर भोजन करता है उस पर भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और उसके पापों को हर लेते हैं।

3. चौमासे के दौरान मनुष्य को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए यानि यौन संबंध से परहेज रखना चाहिए। इसके पीछे स्वास्थय संबंधी कारण भी माना गया है।

4. चौमासे के दौरान आने वाले महीनों के दौरान सावन में साग, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल के सेवन से परहेज रखना चाहिए।

दरअसल चौमासे के इन नियमों के पीछे धार्मिक कारणों के अलावा सेहत से संबंधित कारण भी माने जाते हैं। माना जाता है कि इससे तन मन दुरुस्त रहता है।

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