विशेष एंव सटीक फलादेश तो हमें योग से ही प्राप्त होते है। जन्मकुंडली के विवेचनात्मक अध्ययन से हमें सिर्फ साधारण व फलादेश की जानकारी प्राप्त हो सकती है। जैसे की उदाहरण है की व्यक्ति धनवान है या गरीब है तो कितना? संतना है या नहीं है तो कितनी है, तो क्यों नहीं है? इन योगों की निवृत्ति के उपाय भी हैं। और इसका कारण भी हमें योग ही बताता है। बीमारी तो बता दे पर उसका इलाज ही न बता पाए ऐसा डाक्टर क्या काम का। इन सब बातो को ध्यान में रखते हुए यहां सूर्य,चंद्र के दुष्परिणामों से बचने के उपाय दिए है.....
- गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसी स्त्री से विवाह होने पर स्वयं बदल भाग्य!
1. हमेशा अपने चाल-चलन ठीक रखें।
2. गुड़ को हमेशा बहते पानी के अन्दर बहाएं।
3. भूरी चीटियों को रोज़ शक्कर डालें।
4. घर का दरवाजा पूर्व की ओर रखें।
5. कनक, गुड़, तांबा आदि का दान करें।
6. रविवार का व्रत 5 या 11 या 43 बार रखें।
7. बंदर को गुड़ और चना दें या बंदर का पालन करें।
8. सूर्य उच्च का हो तो सूर्य की चीजों को दान न दें।
9. सूर्य उच्च का हो तो सूर्य की चीजों को दान न लें।
10. आत्मबल बढ़ाना अभीष्ट हो तथा धन प्राप्ति की विशेष इच्छा हो तो सूर्यमंत्र सुवर्ण धातु में पहनें।
- इन 8 लोगों को दान देने से जिंदगी में आते है मुसीबतो के तूफान!

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