1. ड्राई वाइन :- ड्राई वाइन में बहुत थोड़े नैचरल शुगर होते हैं। यानी ड्राई वाइन वाकई में 'स्वीट' नहीं होती है।
2. स्वीट वाइन :- जिस शराब में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, उसे स्वीट वाइन कहते हैं। आमतौर पर ये डिजर्ट वाइन होती हैं। इनको पुडिंग वाइन भी कहा जाता है।
3. असिडिक वाइन :- शराब में इस्तेमाल होने वाले घटकों में प्राकृतिक रूप से ऐसिड मौजूद होते हैं। असिडिक वाइन का रंग नींबू के रंग जैसा होता है और स्वाद सिरका जैसा।
4. टैनन :- शराब में एक कंपाउंड फेनोलिक होता है, जिसकी वजह से इसका स्वाद कड़वा हो जाता है। इसका स्वाद ठीक उसी तरह का होता है, जैसा चाय में। टैनन शराब के स्वाद को कसैला बना देता है और इसका इस्तेमाल काफी समय तक शराब को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
5. सुगंध :- जब आप किसी शराब की क्वॉलिटी जज करते हैं, तो आमतौर पर पहली शर्त बुके होती है, यानी उसके सुगंध के आधार पर शराब की क्वॉलिटी तय करते हैं। एक शराब में फल, मसाले या किसी और तरह की सुगंध हो सकती है। यह सुगंध अंगूर की वरायटी, कहां से यह आता है और शराब की स्थिति पर निर्भर करता है।
6. कॉर्क्ड :- जो शराब खराब हो जाती है, उसे कॉर्क्ड वाइन कहा जाता है।
7. फिनिश :- जब आप शराब गटक जाते हैं और उसके बाद आपके मुंह में जो फ्लेवर रह जाता है, उसे फिनिश कहते हैं। आमतौर पर इसे शराब का ऑफ्टर टेस्ट कहा जाता है।

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