चमड़े से निर्मित पर्स, बेल्ट, जेकैट, हैट आदि पहन कर मंदिर में प्रवेश नहीं किया जाता क्योंकि इससे मंदिर की स्वच्छता, शुद्धता और पवित्रता भंग होती है। चमड़ा मरे हुए पशुओं की खाल होता है, जिस पर बहुत से रसायन लगाकर गंध रहित करके ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। लोग भी बहुत चाव से इन्हें पहनना पंसद करते हैं। चमड़ा पहनना चाहे फैशन का हिस्सा है इसे हाई स्टेटस शो होता है पर क्या किसी मृत जीव की त्वचा को शरीर पर धारण करना उचित है।
धार्मिक दृष्टि से ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी चमड़ा पहनना शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। किसी भी वस्तु को शुद्ध करने के लिए उसे जल से धोया जाता है लेकिन चमड़ा जल का स्पर्श करते ही खराब हो जाता है। चमड़े की कोई भी वस्तु धारण करने पर यदि पानी या पसीने के द्वारा उसका स्पर्श हो जाता है तो त्वचा संबंधित रोग हो जाते हैं। जो भविष्य में घातक भी हो सकते हैं।

إرسال تعليق