धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार जिस कन्या का मुख चंद्रमा के समान गोल, शरीर का रंग गोरा, आंखें थोड़ी बड़ी और होंठ हल्की सी लालिमा लिए हुए हों वह कन्या अपने जीवन काल में सभी सुख भोगती है। जिस स्त्री के शरीर का रंग सोने के समान हो और हाथों का रंग कमल के समान गुलाबी हो तो वह हजारों पतिव्रताओं में प्रधान होती है। जिस स्त्री के हाथ की रेखा लाल, स्पष्ट, गहरी, चिकनी, पूर्ण और गोलाकार हो तो वह स्त्री भाग्यशाली होती है। जिन स्त्रियों की उंगुलियां लंबी, गोल, सुंदर और पतली हो तो वह शुभ फल प्रदान करती हैं। जिसके दोनों आंखों के ऊपर-नीचे की त्वचा हल्की लाल, पुतली का रंग काला, सफेद भाग गाय के दूध के समान तथा बरौनी का रंग काला हो वह स्त्री सुलक्षणा होती है।
जो स्त्री राजहंस तथा मतवाले हाथी के समान चलने वाली हो और जिसकी कमर सिंह अथवा बाघ के समान पतली हो तो वह स्त्री सुख भोगने वाली होती है। इसके अलावा ग्रंथ में यह भी बताया गया है कि जो स्त्री गोरी अथवा सांवले रंग की हो, मुख, दांत व मस्तक चिकना हो वह भाग्यवान होने के साथ ही साथ अपने कुल का नाम बढ़ाने वाली होती है।



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