नॉर्मली हम अकेले रहते हैं तो जैसे मन वैसे रहते हैं लेकिन कोई आ जाए तो अपने आप को सहेजने लगते हैं। हम जितना कम्फर्टेबल अकेले रहते हैं किसी के आने पर उतना ही अनकम्फर्टेबल हो जाते हैं। हमें पल्लु, दुपट्टा चुन्नी लगा कर रही किसी के सामने आना पड़ता है। अगर ऐसा न करें तो दो-चार बातें भी सुनेंगे। क्योंकि समाज ने एक ढर्रा बना दिया है कि हमें छिप के ही रहना है वरना अपोजिट सेक्स वाला इंसान आप पर आक्रमण कर सकता है। एक मैगज़ीन ने एक वीडियो बनायी है जो इंडिया में रहने वाली हर औरत की एक बहुत साधारण सी समस्या को दिखा रहा है..
नॉर्मली हम अकेले रहते हैं तो जैसे मन वैसे रहते हैं लेकिन कोई आ जाए तो अपने आप को सहेजने लगते हैं। हम जितना कम्फर्टेबल अकेले रहते हैं किसी के आने पर उतना ही अनकम्फर्टेबल हो जाते हैं। हमें पल्लु, दुपट्टा चुन्नी लगा कर रही किसी के सामने आना पड़ता है। अगर ऐसा न करें तो दो-चार बातें भी सुनेंगे। क्योंकि समाज ने एक ढर्रा बना दिया है कि हमें छिप के ही रहना है वरना अपोजिट सेक्स वाला इंसान आप पर आक्रमण कर सकता है। एक मैगज़ीन ने एक वीडियो बनायी है जो इंडिया में रहने वाली हर औरत की एक बहुत साधारण सी समस्या को दिखा रहा है..

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