इस अध्ययन को मीडिया में काफ़ी सनसनीखेज़ बनाकर पेश किया गया। मीडिया में इस ख़बर को लेकर बनी सुर्खियां इस तरह से थीं- ‘आप गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो अवसाद की चपेट में आने के लिए तैयार रहें’ या फिर ‘गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली 70 फ़ीसदी महिलाएं अवसाद की चपेट में’। एक अख़बार की हेडलाइन थी- गर्भनिरोधक गोलियां का अवसाद से नाता, ये स्कैंडल से भी ज़्यादा है।
हालांकि यूनिवर्सिटी ऑफ़ एबरडीन में प्राइमरी केयर के प्रोफेसर फ़िल हैनाफ़ोर्ड के मुताबिक, गर्भनिरोधक गोलियों का अवसाद से नाता, उतना गंभीर नहीं है, जितना मीडिया में बताया जा रहा है। वे कहते हैं, “बहुत कम असर होता है।” वे विस्तार से बताते हैं कि प्रत्येक 100 महिलाएं जो गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नहीं करती हैं, उनमें हर साल 1.7 महिलाएं अवसाद से पीड़ित हो जाती हैं, वहीं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने वाली प्रति सौ महिलाओं में 2.2 महिलाएं अवसाद की चपेट में आती हैं।
- अगर आपको भी है ऐसे पैर हिलाने की आदत, तो हो जाएं सावधान
- जानिए महिलाओं में क्यों जरूरी होता है व्हाइड डिस्चार्ज

إرسال تعليق