चैत्र प्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष के प्रारंभ के साथ ही बड़े नवरात्र भी शुरू होते हैं। ये नौ दिन माता की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में देवी की उपासना से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं उन्ही में से एक है। नवरात्रि पर घर में जवारे या जौ लगाने की। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पीछे मान्यता क्या है?
दरअसल नवरात्रि में जवारे इसलिए लगाते हैं क्योंकि मान्यता है कि जब सृष्टी की शुरूआत हुई थी तो पहली फसल जौ ही थी। इसलिए इसे पूर्ण फसल कहा जाता है।
यह हवन में देवी-देवताओं को चढ़ाई जाती है यही कारण है कि इसे हविष्य अन्न भी कहा जाता है। वसंत ऋतु की पहली फसल जो ही होती है। जिसे हम माताजी को अर्पित करते हैं। कहा जाता है जौ उगाकर भविष्य से संबंधित भी कुछ बातों के संकेत मिलते हैं जैसे यदि जौ तेजी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि तेजी से बढ़ती है।
अगर जौ हल्के रंग के हों तो भविष्य में घर की समृद्धि में किसी तरह की वृद्धि होती है और यदि ये जौ मुरझाए हुए या इनकी वृद्धि कम हुई हो तो भविष्य में कुछ अशुभ घटना का संकेत मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार जौ से ही चावल उत्पन्न हुए हैं। लेकिन इस मान्यता के पीछे मूल भावना यही है कि माताजी के आर्शीवाद से पूरा घर वर्षभर धनधान्य से भरा रहे।
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